खाली हाथ


"खाली हाथ"

वो हर बार जब भी बुलाती,
मैं बिना सोचे समझे चला जाता।
वक़्त, नींद, काम, सब छोड़ आता,
बस उसकी एक मुस्कान के लिए।

वो कहती –
"तुम तो हमेशा मिल जाते हो!"
और मैं चुप रह जाता,
क्योंकि कहना चाहता था –
"कभी मुझे ना पाकर भी तो देखो..."

धीरे-धीरे उसने आदत बना ली,
और मैंने अपनी ज़रूरत समझ ली।
वो आगे बढ़ती रही...
मैं वहीं खड़ा रहा, खाली...
बस उसके लिए।

एक दिन उसने कहा –
"अब मुझे अकेला रहने की आदत हो गई है..."
और मैंने मुस्कुराकर कहा –
"मैं तो शुरू से ही अकेला था, बस तुम दिखती थीं..."

पवन

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